मोदी जी और 'बिना बारहवीं पास किये ग्रेजुएशन करें' जैसे विज्ञापन

आजकल प्रधानमंत्री मोदी जी की डिग्री का मामला चारो और चर्चा का विषय है, हम अक्सर दीवारों पर एक विज्ञापन लिखा देखते हैं कि 'बिना दसवीं पास किये बारहवीं करें' या फिर बिना 'दसवीं, बारहवीं पास किये ग्रेजुएशन करें'! तो क्या यह मामला भी कुछ वैसा ही है या फिर जानबूझ कर डिग्री नहीं दिखाई जा रही है? पिछले साल दिल्ली के विधायक और तत्कालीन मंत्री जितेंदर सिंह तोमर पर भी कुछ ऐसा ही आरोप लगा था...

मेरे दिल में यह सवाल घूम रहा है कि अगर जितेंदर सिंह तोमर को डिग्री की जानकारी नहीं देने पर गिरफ्तार किया जा सकता है, यूनिवर्सिटी ले जाकर मालूम किया जा सकता है कि बताओ टॉयलेट किधर है, केंटीन किधर है! अगर अदालत का फैसला आने से पहले ही मीडिया द्वारा मुजरिम ठहरा सकता है तो फिर प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा अब तक बीए की डिग्री की जानकारी नहीं देने पर यह सब क्यों नहीं हुआ?

गुजरात यूनिवर्सिटी से कोई यह क्यों नहीं पूछता कि आखिर उसके पास मोदी जी की बीए की डिग्री की जानकारी क्यों नहीं है? बिना उसके उन्हें एमए में दाखिला कैसे दिया गया था?

सवाल यह है कि क्या कानून और प्रशासन सभी के लिए सामान नहीं होना चाहिए? तोमर के मामले में कोर्ट में केस था, किसी ने एक रोल नंबर दिया और कहा कि यह तोमर का रोल नंबर है और यूनिवर्सिटी कह रही है कि इस रोल नंबर से किसी को डिग्री नहीं दी गई है। कोर्ट ने तोमर से मालूम किया तो जवाब नहीं दिया गया, अभी कोर्ट में केस चल ही रहा था कि पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया और दोनों यूनिवर्सिटीज़ लेकर गई, वहां जाकर जगहों की शिनाख्त कराई गई। इसपर कोर्ट का कमेंट भी था कि जब केस चल रहा है तो गिरफ्तार करने की इतनी जल्दी क्या थी?

सवाल यह नहीं कि डिग्री फर्जी है या नहीं, पर अगर उसके फर्जी होने के आरोप लग रहे हैं और अख़बारों में डिग्री की जो कॉपी दिखाई गई वह गलत निकल रही है तो प्रधानमंत्री को खुद आगे आकर डिग्री दिखानी चाहिए थी। और जब बार-बार मालूम करने पर भी वो जानकारी नहीं दे रहे हैं और अख़बारों में छपी उनकी बीए की डिग्री गलत होने की जानकारी आ रही है तो पुलिस अब उस तरह से विधायक तोमर मामले की तरह सुपर एक्टिव क्यों नहीं है?

गिरफ़्तारी के समय तोमर की डिग्री फर्जी होना साबित नहीं हुआ था और ना ही अभी तक हुआ है। उसपर भी असली डिग्री की जानकारी नहीं देने का आरोप था जो कि अभी प्रधानमंत्री जी पर लग रहा है। इसमें बेहतर तो यह था कि अगर प्रधानमंत्री महोदय के पास डिग्री है तो उन्हें अभी तक उसकी जानकारी उपलब्ध करा देनी चाहिए थी, क्योंकि जितनी देर होगी लोगों के मन में उतने सवाल पैदा होंगे और बाद में अगर जानकारी दे भी दी गई तब भी अधिकतर लोगो के मन में सवाल रह जाएंगे!
आपकी राय:

3 comments:

  1. भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री श्री मनमोहन सिंह जी अपने समय के दुनिया के सबसे पढ़े-लिखे प्रधानमन्त्री थे। विश्व के सबसे काबिल वित्त मंत्री माने गये थे।
    और आज शिक्षा मंत्री हो या प्रधानमन्त्री दोनों ही अपनी डिग्री नहीं दिखा पा रहे हैं। सच तो यह है कि आज जनता मोदी द्वारा दिखाए गये ख्वाबों में ही झुल रही है,तर्क की बजाय कुतर्क करने में व्यस्त है।

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  2. शायद इसी को कलयुग कहते हैं।
    झूठ और न्याय में असमानता। जितनी बढ़ी गद्दी उतनी खुल्ली छूट।

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  3. साँच को आँच क्या! जो सच है वह सबको बताने में लेट लतीफी क्यों!

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