'भ्रष्टाचार' सांप्रदायिकता और डर की राजनीति का असल मक़सद है

राजनैतिक पार्टियों द्वारा सबकी बात करने की जगह सिर्फ हिन्दू या मुसलमानों की बात करना केवल एक भ्रमजाल है, जिससे इन्हे छोड़कर बाकी किसी और को कुछ हासिल होने वाला नहीं है। हमें अलग से कुछ नहीं चाहिए, ज़रूरत इसकी है भी नहीं, बल्कि हमें जो सबका है उसमे से बिना भेदभाव अपना वाजिब और बराबर हक़ चाहिए। यहाँ जितने नेता या पार्टियां हिन्दू-मुस्लिम या किसी और धर्म के लिए स्पेशल वाली बात करते हैं, आज उनसे दूरी बनाने की सख्त आवश्यकता है।

ऐसा हरगिज़ नहीं है कि राजनैतिक पार्टियाँ किसी समुदाय का हित चाहती हैं इसलिए ख़ासतौर पर उनके लिए लड़ती हैं, या फिर किसी दूसरे समुदाय की दुश्मन हैं! बल्कि असलियत यह है कि इनके द्वारा यह सब मायाजाल भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए रचा जाता है। राजनैतिक पार्टियां यह हरगिज़ नहीं चाहती कि देश के लोगों का ध्यान इनके द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार पर जाए। बल्कि साम्प्रदायिकता का असल मक़सद ही भ्रष्टाचार है, इसी मक़सद के लिए जनता को दो ग्रुपों में बाँट दिया गया है। 

यह लोग हमारे हितों के सिर्फ नारे लगाकर और दूसरे पक्ष की बेबुनियाद बातों से डराकर हमें अपना मानसिक गुलाम बनाए रखना चाहते हैं। और इसके पीछे का कारण यह है कि हमें अगर इनके भ्रष्टाचार का पता भी चल जाए तो हमारे पास इनका समर्थन करने की जगह कोई दूसरा चारा नहीं हो। आज अक्सर राजनैतिक दल हिन्दू-मुस्लिम हित या फिर दुश्मनी का चोगा ओढ़ें हुए हैं और कुछ इस राजनीति के विरोध की राजनीति करते हैं, जबकि अगर ध्यान दिया जाए तो पता चलेगा कि इसमें से किसी ने भी किसी का भला नहीं किया और ना ही सांप्रदायिक राजनीति का विरोध करने की राजनीति करने वालों ने ही साम्प्रदायिकता समाप्त करने  की कोई कोई पहल की। असल बात यह है कि यह राजनैतिक दल हमें इन मुद्दों में उलझाकर जनता के सरोकार से जुड़े मुद्दों से दूर रखना चाहते हैं।

हमें यह समझना होगा कि आज की ज़रूरत इस राजनीति और इसके कारण देश को हो रहे नुकसान को पहचानकर ऐसे राजनेताओं / पार्टियों से पीछा छुड़ाने की है।
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