आरक्षण का मक़सद

आरक्षण का मक़्सद गरीबी का उत्थान हरगिज़ नहीं है बल्कि सदियों से जानवरों जैसी ज़िल्लत झेल रही क़ौमों को बराबरी पर ला खड़ा करने की कोशिश है। और इस आधार पर मैं मुसलामानों को आरक्षण देने के ख़िलाफ़ हूँ क्योंकि इस्लाम ग़ैरबराबरी नहीं सिखाता और सभी लोग मस्जिदों में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं। और फिर मुस्लिम तो स्वयं ही 'ज़कात' के द्वारा गरीबों को सशक्त बनाने की कोशिशों का दावा करते हैं। फिर आरक्षण की मांग क्यों?

जहाँ तक बात आरक्षण की ज़रूरत की है तो पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने का मक़्सद अन्य लोगों के मुक़ाबले इन जातियों के सदियों से चले आ रहे शोषण के कारण अंदर पैठ बना चुकी हीन भावना और उसके कारण रुके बौद्धिक विकास के फासले को पाटना है। इसके लिए सामाजिक भेदभाव खत्म होने के बाद भी कम से कम 1-2 पीढ़ियों तक शैक्षिक संस्थानों एवं नौकरियों में आरक्षण जारी रखना ज़रूरी है, तभी वोह लोग मुक़ाबले में बराबर की टक्कर देने की स्थिति में आ पाएंगे।

अगर बात गरीबों की करें तो उन्हें बिना आरक्षण दिए ही सपोर्ट की जा सकती है, गरीबी के उत्थान करने एवं शोषण समाप्त करने के लिए आर्थिक तौर से सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता है तथा इसके साथ-साथ सरकारी शैक्षिक संस्थानों को मज़बूत करना बेहद आवश्यक है। पहुँच से दूर वाली आवश्यक वस्तुओं के लिए सभी सरकारें सब्सिडी भी देती ही हैं! ज़रूरत इस तरह के फैसले करने और कार्यान्वन के लिए अमल के तरीकों में बदलाव लाने की है।

क्या आपको पटेल समुदाय के इस आरक्षण आंदोलन पर संदेह नहीं होता?

कोई भी सरकार इतनी भारी भीड़ होने के बावजूद इस तरह लोगों को भड़काने की कोशिश नहीं करती है, कहीं यह सब जानबूझ कर तो नहीं हो रहा है? सवाल यह भी है कि कम से कम ‪गुजरात‬ में तो ‪संघ‬ की मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता फिर यह तो‪ तूफ़ान‬ सरीखा है, आख़िर यह अंजाम तक कैसे पहुंचा कि ना तो संघ को इसकी भनक लग पाई और ना ही सरकार को।

हैरत करने वाली बात यह भी है कि आज के ज़माने में 'ना' के बराबर सरकारी नौकरी वाले ‪'आरक्षण‬' के लिए एक अमीर क़ौम (पटेल) की इतनी मारा-मारी, इतना बड़ा आंदोलन? कहीं यह सब ‪समस्याओं से ध्यान हटाने या फिर '‎आरक्षण‬' जैसे प्रावधान के प्रति लोगों में नफरत बढ़ाने जैसा कोई बड़ा और पूर्वनियोजित षड्यंत्र तो नहीं है?

और इस हैरानगी के पीछे की सोच यह है कि बिना आरक्षण के ही गुजरात में केवल 20 फीसदी आबादी वाले 'पटेल समुदाय' के वर्तमान में 41 विधायक, 8 मंत्री, मुख्यमंत्री, 16 IAS, 10 IPS, 34 SP, राज्य सचिवालय में 100 ऑफिसर हैं... तथा यह प्रदेश में सबसे ज्यादा धनवान कम्युनिटी है, विदेशो में सबसे ज्यादा व्यापर पर काबिज है, हीरा व्यापार पर ज्यादातर इन्ही का कब्ज़ा है, इसके अलावा गुजरात का सबसे ज्यादा दबंग समुह होने के बावजूद इतना बड़ा हंगामा?

चालान के साथ चाल-चलन भी घर पहुंचा :P

एक बेचारा नोएडा एक्सप्रेस-वे पर कार से अपनी गर्लफ्रेंड के साथ आगरा जा रहा था (यह अलग बात है कि वोह शादी-शुदा है)।एक्सप्रेस-वे पर जब उसकी कार एक ट्रैफिक सिग्नल पर तेज गति से निकली तो सीसीटीवी कैमरे से फोटो खिंच गई। इसके बाद ई-चालान बना और उसके घर पहुंच गया। अब परेशानी यह हुई कि चालान उसकी पत्नी को मिला, जिसमें गर्लफ्रेंड के साथ उसकी तस्वीर थी! tongue emoticon

 — feeling यह बेचारा तकनीक का मारा.