क्या पीएम की आगवानी के लिए एक भी अमेरिकी प्रतिनिधि का ना होना देश का अपमान नहीं है?

क्या यह देश का अपमान नहीं कि हमारे देश का प्रधानमंत्री अमेरिकी यात्रा पर पहुंचे तो आगवानी के लिए वहां का कोई छोटे से छोटा मंत्री भी नहीं पहुंचे, यहाँ तक कि किसी को आगवानी के लिए ऑफिशियली अपोइंट भी ना किया जाए? हमारी एम्बेसी को उन्हें रिसीव करना पड़े!


यह हाल तब है जबकि उनका वर्तमान तो क्या अगर भूतपूर्व राष्ट्राध्यक्ष भी हमारे यहाँ आता है तो हम अपनी पलकें तक बिछा देते हैं! मेहमान नवाज़ी में कोई कसर नहीं छोड़ते।

कुछ लोगो का विचार है कि वोह यूनाइटेड नेशंस की सभा में भाग लेने गए हैं, अमेरिकी यात्रा पर नहीं। अगर इस तर्क को मान भी लिया जाए तो क्या अमेरिका की कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती? हमारे देश में सार्क देशों के सम्मलेन में आने वाले प्रतिनिधियों का भी हम ऐसे ही स्वागत करते हैं जैसे बाकी समय आए किसी प्रतिनिधि का। 

मैं बात-बात में अमेरिका की रट लगाने वालों से पूछना चाहता हूँ कि यह किस तरह का आचरण है कि कोई राष्ट्राध्यक्ष उनके देश में पधारे तो उसकी आगवानी भी ना की जाए? 

हमारे देश की विश्व में एक अहमियत है और देश का प्रधानमंत्री कोई एक व्यक्ति भर नहीं बल्कि 122 करोड़ लोगो का प्रतिनिधि होता है। फिर चाहे वह यूनाइटेड नेशंस की सभा में भाग लेने के लिए ही अमेरिका क्यों ना गए हों तब भी देश के प्रधानमंत्री को कम से कम इतना सम्मान तो मिलना ही चाहिए!





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1 comments:

  1. bilkul aapki baat se sahmat hu....
    ye apman hai saza arab hindustaniyo ka

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