रावण-दहन ना देख पाने की मायूसी


बेटियां बहुत नाराज़ थी! बड़ी बिटिया 'ऐना' बोली कि आप अच्छे नहीं हैं, आपने promise किया था और break कर दिया!

कल दोनों बेटियों को रावण दहन दिखाने ले कर गया था, मगर कल बहुत ही व्यवस्थित कार्यक्रम था। इस बार खाली मैदान के आगे बैठने का इंतजाम किया गया था, जिसको बड़े से पांडाल से कवर किया गया था। मगर उसमें अन्दर जाने के लिए बहुत लम्बी लाइन लगी थी।

हालाँकि पीछे से वीआईपी पास से जाने का इंतजाम था, मगर मुझे वहां से अन्दर जाना घंटों से लाइन में लगी इतनी भारी भीड़ के साथ अन्याय लगा। इसलिए मैं बाहर से ही बेटियों को किसी तरह समझा-बुझा कर वापिस ले आया... मगर उनका सारा उत्साह मायूसी में तब्दील हो गया!
आपकी राय:

9 comments:

  1. thoda kasht sahkar ravan dahan dikhana hi chahiye tha .

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    1. शिखा जी, क्या कहूँ, भीड़ ही इतनी थी कि हिम्मत ही नहीं कर सका। पहले इंतजाम खुले मैदान में होता था, बिना किसी ताम-झाम के और हम भीड़ से दूर खड़े होकर ही बच्चो को दिखा लाते थे। मगर इस बार 'इंतजाम' के 'तामझाम' के कारण हम ही नहीं पता नहीं कितने लोगो को वापिस जाना पड़ा!

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    1. विजय भाई इतनी भीड़ देखकर बच्चों को लाइन में लगाने की हिम्मत ही नहीं कर सका :-(

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  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (15-10-2013) "रावण जिंदा रह गया..!" (मंगलवासरीय चर्चाःअंक1399) में "मयंक का कोना" पर भी है!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. शुक्रिया शास्त्री जी!

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  4. Ek Sachhi प्यार की बात Ka Varnan Jab Koi Karta Hai Dil Bhar Aata Hai.

    Thank You.

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