चुनावी मौसम में मासूमों की बलि

सेनाएँ तैयार हो चुकी हैं, सेनापति ताल ठोक रहे हैं... मासूम जनता की बलि चढ़ाई जा रही है... देश की फिज़ा को बदबूदार बनाए जाने की कोशिशें रंग ला रही हैं। पिद्दी से पिद्दी पार्टी का नेता भी हर हाल में प्रधानमंत्री बनना चाहता है... आखिर यह इलेक्शन होते ही क्यों हैं???

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1 comments:

  1. हां सच कहा आपने और सच में ही शाहनवाज़ भाई मुझे तो लगता है कि ये चुनाव लोकतंत्र का शोक मनाने के लिए होता है ।

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