यह तेरा घर, यह मेरा घर?

आखिर यह रीत किसने बनाई कि पत्नी ही शादी के बाद अपना घर छोड़ कर ससुराल जाए, इक्का-दुक्का जगह पति भी जाते हैं पत्नी के घर। मगर यह रीत क्यों? पति-पत्नी मिलकर घर क्यों नहीं बनाते हैं?

जहाँ उन दोनों को और उन दोनों के परिवार वालों को एक सा सम्मान, एक सा प्यार और एक से अधिकार मिले।

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3 comments:

  1. काश ऐसा हो जाये ....:)

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  2. अब ऐसा हो रहा है,शाहनवाजजी.मेरे एक मित्र की बेटी का एक सहकर्मी के साथ परिचय,स्नेह और प्रेम हुआ.फिर दोनो ने मिलकर बंगलौर में,जहाँ वे कार्यरत थे,घर लिया.अपने घर के लोगों को दोनो ने सूचित किया कि वे विवाह के बंधन में बँधना चाहते हैं.दोनो के घर के लोगों ने विवाह की पूरी रूपरेखा तय की.विवाह हुआ और अब दोनो अपने बनाए हुए घर में रह रहे हैं.

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