केजरीवाल के आरोप और कांग्रेस की बेचेनी

अगर रॉबर्ट वाड्रा पर केजरीवाल के आरोप झूठे हैं तो फिर कांग्रेस में इतनी बेचेनी क्यों है? 

और अगर आरोप सही हैं तो फिर केजरीवाल मीडिया के द्वारा सनसनी फैलाने की जगह जाँच के लिए सबूतों के साथ सी.बी.आई जैसी किसी जाँच एजेंसी या फिर न्यायलय के पास क्यों नहीं गए?
आपकी राय:

16 comments:

  1. आप भी न बड़े नादान हैं...अपने दामाद के खिलाफ़ जाँच करेगा कोई ?

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  2. जायदाद आधी मिले, कानूनन यह सत्य |
    बेटी को दिलवा दिया, हजम करो यह कृत्य |
    हजम करो यह कृत्य, भृत्य हैं गिरिजा सिब्बल |
    चाटुकारिता काम, दिया उत्तर बेअक्कल |
    माँ की दो संतान, बटेगा आधा आधा |
    देखे हिन्दुस्तान, कहीं डाले ना बाधा ||

    बहुओं पर इतनी कृपा, सौंप दिया सरकार ।
    बेटी से क्या दुश्मनी, करते हो तकरार ।
    करते हो तकरार, होय दामाद दुलारा ।
    छोटे मोटे गिफ्ट, पाय दो-चार बिचारा ।
    पीछे ही पड़ जाय, केजरी कितना काला ।
    जाएगा ना निकल, देश का यहाँ दिवाला ।

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  3. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक कुछ कहना है पर है ।।

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  4. धन्यवाद रविकर जी...

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  5. संतोष भाई, जाँच के लिए सास-ससुर के पास नहीं बल्कि न्यायालय के पास जाने के लिए कहा जा रहा है....

    अब न्याय के लिए कम से कम न्यायालय पर तो विश्वास करना पड़ेगा... या वोह भी नहीं?



    संतोष त्रिवेदी said...
    आप भी न बड़े नादान हैं...अपने दामाद के खिलाफ़ जाँच करेगा कोई ?

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  6. न्यायालय का रास्ता तो अभी भी खुला है मेरे दोस्त पर ऊ जब तक फैसला सुनाएगा,भाई लोग खा-पी के सरक लेंगे !
    ...मीडिया में आना ज़रूरी है नहीं तो चीज़ों को आसानी से दबा दिया जाता है !

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  7. न्यायालय की लाख कोशिशों के बावजूद कालेधन वाले मामले में सरकार ने अब तक कोई जांच के लिए सकारात्मक कदम नहीं उठाया है तब तक सारा कालाधन ठिकाने भी लग जाएगा इसलिए जब तक अम्मा नहीं चाहेगी तब तक कुछ होने वाला नहीं है इसलिए सार्वजनिक रूप से आरोप लगाकर जनता को तो जगाया ही जा सकता है !!

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  8. अगर यही सोच है तो यह अन्याय है... न्याय में चाहे कितनी भी देर लगे, लेकिन न्याय न्याय के तरीके से ही होना चाहिए...

    न्याय पाने के लिए इस तरह के तरीके अपनाए जाना बेहद खतरनाक है! क्योंकि इस तरह के मिडिया ट्राइल के द्वारा कितने ही बेक़सूर भी कसूरवार ठहरा दिए जाते हैं... कितने ही बेक़सूर लोगो को समाज के द्वारा आतंकवादी समझा जाता है...

    इस तरह की कोशिश करना इन राजनीतिज्ञों का काम है, जो राजनीति में फायदे नुक्सान के लिए यह करते हैं.... लेकिन यहाँ मकसद राजनितिक फायदा-नुक्सान नहीं बल्कि सच को दुनिया के सामने लाना होना चाहिए...

    ना कि किसी इलज़ाम लगाते ही सच साबित हो जाने का अहसास...


    संतोष त्रिवेदी said...
    न्यायालय का रास्ता तो अभी भी खुला है मेरे दोस्त पर ऊ जब तक फैसला सुनाएगा,भाई लोग खा-पी के सरक लेंगे !
    ...मीडिया में आना ज़रूरी है नहीं तो चीज़ों को आसानी से दबा दिया जाता है !

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  9. पूरण खण्डेलवाल said...
    न्यायालय की लाख कोशिशों के बावजूद कालेधन वाले मामले में सरकार ने अब तक कोई जांच के लिए सकारात्मक कदम नहीं उठाया है तब तक सारा कालाधन ठिकाने भी लग जाएगा इसलिए जब तक अम्मा नहीं चाहेगी तब तक कुछ होने वाला नहीं है इसलिए सार्वजनिक रूप से आरोप लगाकर जनता को तो जगाया ही जा सकता है !!


    पूरण खंडेलवाल जी, अगर जनता से जुड़े मामलों पर जनता के प्रदर्शनों, धरनो इत्यादि के बाद भी सरकार कोई कदम नहीं उठाती तो ऐसी सरकारों को जनता के द्वारा बदला जाना चाहिए... और जनता की नई सरकार के द्वारा सही तरीके से जाँच करवाई जानी चाहिए...

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  10. और हाँ... किसी भी देश में किसी अम्मा के चाहने से नहीं बल्कि जनता के चाहने से ही सबकुछ होता है... लेकिन इसके लिए जनता को अपने हक़ के लिए जागरूक होना पड़ेगा... अपने धर्म / समाज / जाती या फिर 'अपनी पार्टी' से ऊपर उठ कर वोट डालना होगा...

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  11. गाफिल जी अति व्यस्त हैं, हमको गए बताय ।

    उत्तम रचना देख के, चर्चा मंच ले आय ।

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  12. केजरीवाल तो आगये जनता की अदालत में अब मानहानि का मुकदमा कांग्रेसी हरकारे करें केजरीवाल साहब पे .ये तर्क को अपनी जिद से पस्त करने वाले हरकारे हैं इन्हें कौन मना समझा सकता है .ब्रह्मा जी भी नहीं .
    ram ram bhai
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    सोमवार, 8 अक्तूबर 2012
    अथ वागीश उवाच :ये कांग्रेसी हरकारे

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  13. लालू प्रसाद यादव का क्या हुआ शाहनवाज भाई ? वाड्रा तो बहुत बड़ी तोप है ! आज तक किसी गुलाम ने यह पूछने की तक जुर्रत नहीं की कि जैसे एअरपोर्ट पर कुछ VVIP को सुरक्षा जांच से छूट मिली हुई है, वैसी ही छूट वाड्रा को क्यों मिली , तो न्याय की उम्मीद क्या ख़ाक रखोगे ?

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    1. लेकिन आखिर एयरपोर्ट पर उन्हें VVIP जैसी सुरक्षा जाँच से छूट क्यों और कैसे मिली है? क्या इसके खिलाफ किसी ने जनहित याचिका दायर की?

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  14. केजरी चाहे सर धुनें,कुछ भी न हो पाय
    वाड्रा तो दामाद है,छूट उसे मी जाय,,,,,,,

    RECENT POST: तेरी फितरत के लोग,

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