जामा मस्जिद का इमाम कोई बुखारी ही क्यों?

आखिर जामा मस्जिद में इमाम की नियुक्ति में परिवारवाद क्यों चलता आ रहा है? जबकि यह इस्लाम का तरीका भी नहीं है.

किसी भी मस्जिद के इमाम को नियुक्त करने की ज़िम्मेदारी वहां की कमेटी की होती है, इस्लाम में मस्जिद की इमामत तो क्या मुल्क की देखभाल करने (जिसे आप राज करना भी कह सकते हैं) जैसे महत्वपूर्ण कामों में भी पारिवारिक दखल की कोई गुंजाइश नहीं होती, बल्कि यह निर्णय काबिलियत के एतबार से होता है. फिर आखिर कोई बुखारी परिवार का सदस्य ही क्यों जामा मस्जिद की इमामत संभालता हैं? हैरत की बात है की कहीं कोई विरोध भी नहीं है?

बेचारे ड्राइवर रहते हैं चौबीस घंटे बस में :-)


एक यात्री ने उत्सुक्तावश  ड्राइवर से मालूम किया: 

ड्राइवर साहब आप बस में कितने घंटे रहते हैं?




ड्राइवर भी हाज़िर जवाब था, फट से यात्री से बोला: 

चौबीस घंटे।



यात्री ने हैरानगी दिखाते हुए मालूम किया:

यह कैसे संभव है?



ड्राइवर फट से बोला:

मित्र, आठ घंटे सरकार की बस में और सौलह घंटे पत्नी के बस में!